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अमृत वाणी - जसनाथजी की दिव्य वाणी
📖 Jasnathji की अमृत वाणी
🙏 सिद्ध महात्माओं की अमृतवाणी भारतवासियों के लिए सदा सुलभ रही है। हमारे परम पूज्य ऋषियों ने समाज कल्याण के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है।
🏡 कतरियासर के मूल निवासी
- सिद्ध और जाट, दोनों ज्याणी शाखा के एक ही पूर्वज की संतान हैं।
- जसनाथजी की मान्यता सभी सम्प्रदायों में समान रूप से है।
- गुरु गोरखनाथ के शिष्य के जीवन में कई चमत्कारी घटनाएं घटीं।
📢 जसनाथजी के उपदेश
🔹 हे राव! सुनो, हे राणा! सुनो! केवल धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके अनुसार आचरण भी करना चाहिए।
🔹 ऊँकार रूप पितामह द्वारा ही संपूर्ण सृष्टि की रचना हुई है।
⚖️ अहंकार का अंत
☠️ महाबली यमराज (मृत्यु) ने जरासन्ध, कंस और चाणूर जैसे बलशाली दानवों का अंत कर दिया।
🕉️ भगवान के नाम के बिना रत्ती भर भी राज्य नहीं टिक सकता।
🏆 सत्य की सदा विजय होती है।
🧘 जसनाथजी का योग और समाज सुधार
जसनाथजी जन्म से ही योगी थे। किशोरावस्था में उन्होंने जो बातें कहीं और लिखीं, वे सभी उच्चकोटि के आध्यात्मिक भावों से पूर्ण थीं।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
जसनाथजी कौन थे?
✅ जसनाथजी एक महान सिद्ध पुरुष थे जिन्होंने समाज सुधार और आध्यात्मिक जागरण के लिए कार्य किया। वे सिद्ध संप्रदाय के संस्थापक माने जाते हैं।
जसनाथजी की शिक्षाएँ क्या थीं?
✅ जसनाथजी ने सत्य, सेवा, भक्ति और साधना पर जोर दिया। वे अहंकार, लोभ और अधर्म के विरुद्ध थे।
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