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1857 revolt - राजस्थान की स्थिति

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राजस्थान में 1857 के संग्राम के कारण


राजस्थान में 1857 का संग्राम
राजस्थान में 1857 का संग्राम

    राजस्थान में अंग्रेज विरोधी वातावरण के पीछे अंग्रेजों की नीतियाँ ही जिम्मेदार थी। राजस्थान के राज्यों एवं ईस्ट इंडिया कम्पनी के मध्य हुई 1817-18 ई. की संधि में स्पष्ट उल्लेख था 

    कम्पनी सरकार राजपूत राज्यों के आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगी। संधियों से उन्हें मराठा आक्रमणों एवं सामन्तों के उपद्रवों से तो मुक्ति मिल गई, मगर सुव्यवस्था स्थापित करने एवं राजस्व बढ़ाने के नाम पर पॉलिटिक एजेन्टों ने राज्यों के प्रशासन एवं आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना प्रारम्भ कर दिया। 

    जिससे शासकों की राजनीतिक स्थिति एवं सम्मान में कमी आई। तथा उनकी सुरक्षा के नाम पर बनी सैनिक टुकड़ियों (मेवाड़ भीलकोर, कोटा लीजियन, जोधपुर लीजियन) के रख-रख के लिए निरन्तर बढ़ती माँगों ने उनके व्यय में वृद्धि की। जिससे राज्यों की वित्त स्थिति पर बुरा प्रभाव पड़ा। कोटा राज्य को अंग-भंग करके नए राज्य झालावाड़ (1838 ई.) की स्थापना कर दी।


    ‌अंग्रेजी आर्थिक नीतियों, नमक एवं अफीम पर एकाधिकार, रेलवे का विस्तार, भू-बंदोबस्त एवं अंग्रेजी माल के प्रसार ने ग्रामीण किसानों, दस्तकारों एवं व्यापारियों की दशा को शोचनीय बना दिया। व्यापारियों ने पलायन शुरू कर दिया। दस्तकार खेती की ओर अग्रसर हो गए तो दूसरी ओर किसान वर्ग का जीवन निर्वाह भी कठिन हो गया।


    ‌अंग्रेजों के सामाजिक सुधारों ने जनसामान्य को उनके प्रति शंकालु बना दिया। सतीप्रथा को रोकने का नियम धर्म के खिलाफ समझा गया और समाज में अंग्रेजों के प्रति घृणा का कारण बना। कन्यावध, त्याग, डाकन प्रथा, औरतों एवं लड़कियों का क्रय- विक्रय, गुलामी प्रथा, समाधि आदि सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने के लिए अंग्रेजी दबाव को राजस्थान की रूढ़िवादी जनता ने पसन्द नहीं किया। 

    बड़ी संख्या में ईसाई मिशनरियों ने जब राजस्थान में शिक्षा, चिकित्सा एवं समाज सुधार के क्षेत्र में कार्य करना शुरू किया तो राजस्थान की धर्मभीरू जनता ने इसे अपने धर्म के लिए खतरा माना और अंग्रेज विरोधी हो गई

    कवियों ने बीकानेर महाराजा रतनसिंह की प्रशंसा की, जिसने जवाहरजी को अंग्रेजों के सुपुर्द करने से इनकार कर दिया तथा जोधपुर महाराजा तख्तसिंह की आलोचना की, क्योंकि उसने डूंगजी को अंग्रेजों के सुपुर्द कर दिया था। अतः साहित्य ने भी अंग्रेज विरोधी वातावरण तैयार करने में भूमिका निभाई।


    ‌इन परिस्थितियों में नई एनफील्ड राइफल्स, आटे में हड्डियों का चूरा मिलाने की अफवाह ने पहले से ही असंतुष्ट चल रही सेना को अंग्रेजों के विरुद्ध शस्त्र उठाने के लिए प्रेरित किया। मेरठ में सैनिक विद्रोह की सूचना ने राजस्थान में भी स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत कर दी


    1857 से पूर्व कंपनी की राजस्थान स्थिति


    ‌1857 की क्रांति के समय राजपूताने पर उत्तरी-पश्चिमी प्रान्त (नॉर्थ वेस्टर्न प्रॉविन्सेज) के लेफ्टिनेन्ट गवर्नर कोलविन का नाममात्र का नियन्त्रण था। उसका मुख्यालय आगरा में था।
    ‌अजमेर-मेरवाड़ा का नागरिक प्रशासन वहाँ नियुक्त कमिश्नर कर्नल डिक्शन द्वारा संचालित था। 

    राजपूताने के देशी राज्यों पर नियन्त्रण रखने के लिए पॉलिटिकल एजेन्ट नियुक्त थे जो राजपूताना रेजीडेन्सी के सर्वोच्च अधिकारी ए. जी. जी. (एजेन्ट टू द गवर्नर जनरल) के अधीन थे। इसका कार्यालय अजमेर में था । गर्मी के दिनों में उसका निवास स्थान माउण्ट आबू में रहता था।


    ‌राजपूताना में 1857 में नियुक्त पॉलिटिकल एजेन्ट

    प्रतिनिधि स्थान
    विलियम ईडन जयपुर
    मॉरीसन & निक्सन भरतपुर
    मेजर बर्टन कोटा
    कैप्टन शॉवर्स उदयपुर
    जे.डी. हॉल सिरोही
    मैक मैसन जोधपुर

    ए.जी.जी. जॉर्ज पैट्रिक लॉरेन्स ने अजमेर की सुरक्षा को प्राथमिकता दी क्योंकि अजमेर राजपूताने के मध्य में स्थित था। अजमेर की सुरक्षा के लिए 15वीं नेटिव इन्फेन्ट्री की दो सैनिक टुकड़ियाँ तैनात थीं। इन पर विश्वास नहीं किया जा सकता था क्योंकि ये कुछ समय पहले मेरठ से यहाँ आई थीं। अतः ए. जी. जी ने डीसा से यूरोपियन सैनिकों को अजमेर बुलवाने की व्यवस्था की।
    ‌इसके पहले कि यूरोपियन सैनिक अजमेर पहुँचते कमिश्नर डिक्शन ने ब्यावर से मेर रेजीमेन्ट के सैनिकों को अजमेर बुला लिया। लेफ्टिनेन्ट कारनेल के नेतृत्व में मेर रेजीमेन्ट ने अजमेर की सुरक्षा का भार सम्भाल लिया। 15यों नेटिव इन्फैन्ट्री को सैनिक टुकड़ियों को नसीराबाद स्थानान्तरित कर दिया गया जहाँ उनके शेष साथी तैनात थे।
    ‌जोधपुर के महाराजा तख्तसिंह ने मॉक मेसन के आदेशानुसार सेनानायक कुशलराज सिंघवी की कमान में जोधपुर की अश्ववारोही सेना अजमेर की रक्षार्थ भेजी। 


    राजस्थान में इस समय छः अंग्रेज सैनिक छावनियाँ नीमच, नसीराबाद, देवली खैरवाड़ा, ऐरनपुरा और ब्यावर में थी। इन छावनियों में अंग्रेज सैनिक टुकड़ियाँ थी मगर, इनमें अधिकांश सैनिक भारतीय थे। छावनियों में सबसे शक्तिशाली छावनी नसीराबाद को थी, जिसमें बंगाल नैटिव इन्फेन्ट्री के सैनिक थे। देवली में कोटा कन्टिन्जेन्ट, ब्यावर में मेरवाड़ा बटालियन, ऐरनपुरा में जोधपुर लीजियन खैरवाड़ा में मेवाड़ भील कोर तथा अजमेर में बंगाल नेटिव इन्फेन्ट्री तैनात थी। 


    प्रमुख सैनिक छावनियाँ


    छावनियाँ               स्थान   
    नसीराबाद अजमेर
    ब्यावर अजमेर
    एरिनपुरा पाली
    देवली टोंक
    नीमच मध्यप्रदेश
    खेरवाड़ा उदयपुर

     

    1857 की क्रांति के MCQ


    1➤ राजस्थान में 1857 की क्रांति के समय यहाँ के ए, जी.जी. (एजेन्ट टू गवर्नर जनरल) कौन थे?

    ⓐ कप्तान ब्लेक
    ⓑ हेनरी लॉरेन्स
    ⓒ कप्तान हीथकोट
    ⓓ जॉर्ज पैट्रिक लॉरेन्स

    2➤ सन् 1857 ई. के विद्रोह के समय राजस्थान में सैनिक छावनियाँ थीं- [PSI (मोटर वाहन 12.02.2022][VDO-28.12.2021]

    ⓐ सात
    ⓑ छ
    ⓒ चार
    ⓓ पाँच

    3➤ 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में कोटा महाराव की सहायता के लिए किस राज्य ने सैनिक सहायता भेजी थी?

    ⓐ बूंदी
    ⓑ करौली
    ⓒ झालावाड़
    ⓓ जयपुर

    4➤ 1857 के विद्रोह के प्रति मेवाड़ के महाराणा की क्या नीति थी? [School Lecturer 2020]

    ⓐ विद्रोहियों को सहयोग
    ⓑ उदासीनता
    ⓒ अंग्रेजों को सहयोग
    ⓓ उपर्युक्त में से कोई नहीं

    5➤ 1857 के विद्रोह के दौरान अंग्रेजों को अपनी दी गयी सेवाओं के बदले में जयपुर महाराजा को ईनाम दिया गया -Assistant professor 2024)!

    ⓐ कोटपुतली का परगना
    ⓑ मनोहरपुर का परगना
    ⓒ बसवा का परगना
    ⓓ नारनौल का परगना

    6➤ 1857 ई. की क्रान्ति में अंग्रेजों व जोधपुर की संयुक्त सेना को पराजित करने वाला था? (स्कूल व्याख्याता-2014][RAS. Pre Exam, 1993] [सीईटी: 07.01.2023 )

    ⓐ आउवा के ठाकुर
    ⓑ महाराजा रामसिंह
    ⓒ तात्या टोपे
    ⓓ टॉक के नवाब वजीरखाँ

    7➤ निम्नलिखित में से 1857 ई. की क्रांति में कौनसा युद्ध में जोधपुर का पॉलिटिकल एजेंट मैसन माग गया था?[द्वितीय ग्रेड जीके-21.12.2020]

    नीमच का युद्ध
    ⓑ कोठारिया का युद्ध
    ⓒ चेलावास का युद्ध
    ⓓ नसीराबाद का युद्ध

    8➤ कुशालसिंह की पराजय के बाद ब्रिटिश सेना आउवा पर कब्जा किया- [Librarian Gr.-III-2016]

    ⓐ 20 जन., 1858 ई.
    ⓑ 24 जन., 1859
    ⓒ 24 जन., 1858 ई.
    ⓓ 26 फर., 1858

    9➤ स्थान जहाँ आउवा के ठाकुर कशालसिंह ने अंतिम समय व्यतीत किया वह था-[स्कूल व्याख्याता (संस्कृत शिक्षा)2020]

    नीमच
    ⓑ उदयपुर
    ⓒ आउवा
    ⓓ कोठारिया

    10➤ 20 जनवरी, 1858 को किस अंग्रेज शासक ने आउवा पर आक्रमण किया? [जेल प्रहरी 27-10-2018, ]

    ⓐ चार्ल्स मैटकॉफ
    ⓑ कर्नल होम्स
    ⓒ पी.टी. फेंच
    ⓓ केप्टिन लूडलो

    11➤ 8 सितम्बर, 1857 को... स्थान पर ठाकुर कुशालसिंह की सेना ने जोधपुर की राजकीय सेना को पराजित किया - [कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक 22.9.2019]

    ⓐ बिथौड़ा
    ⓑ खेजड़ली
    ⓒ आसोप
    ⓓ गूलर

    12➤ आउवा के युद्ध में किस ब्रिटिश पॉलीटिकल एजेन्ट की हत्या कर दी गई थी ? [लाइब्रेरियन गार्डे-III - 19.09.2020]

    ⓐ मेजर ईडन
    ⓑ पैट्रिक लॉरेंस
    ⓒ मॉक मेसन
    ⓓ केप्टन शावर्स

    13➤ 1857 के विद्रोह के समय आउवा के ठाकुर कुशालसिंह को मेवाड़ के किस स्थान के सामन्त ने अपने यहाँ शरण दी ? [कॉलेज व्याख्याता (सारंगी) परीक्षा 30.05.2019]

    ⓐ कोठारिया
    ⓑ भिंडर
    ⓒ बदनोर
    ⓓ आसीन्द

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