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राजस्थान में खारे पानी की झीलें वह उनकी ट्रिक

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राजस्थान में खारे पानी की झीलें
By:-
Vikarm karawasra

📚📚📚📚📚GKTrick – राजस्थान में खारे पानी की झीलों के नाम याद रखने की ट्रिक –
Trick – ‘कुत्ता साड़ी का पल्लू फाड़े’
🐩🚺👰🔪
  • कु – कुचामन (नागौर)
  • ता – तालछापर चुरू
  • सा – सांभर (जयपुर)
  • डी – डीडवाना (नागौर)
  • का – कावोद (जैसलमेर)
  • प – पचपदरा (बाड़मेर)
  • लू – लूणकरणसर (बीकानेर)
  • फा – फलोदी (जोधपुर)
  •  डे – डेगाना (नागौर)

YouTube channel study quake Link:-https://youtu.be/UbiDrkZRNKA


1.कुचामन झील (नागोंर)🔶🔶🔶🔶🔶

💠यह झील कुचामन सिटी नागौर में है|

2.सांभर झील🔷🔷🔷🔷🔷🔷🔷🔷

:-)यह झील जयपुर की फुलेरा तहसील में स्थित है। 
:-)बिजोलिया शिलालेख के अनुसार इसका निर्माण चौहान शासक वासुदेव ने करवाया था।
:-)यह भारत में खारे पानी की आन्तरिक सबसे बड़ी झील है इसमें खारी, खण्डेला, मेन्था, रूपनगढ नदियां आकर गिरती है। 
यह झील दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की ओर लगभग 32 किमी लंबी तथा 3 से 12 किमी तक चौड़ी है।
:-)यह देश का नमक बनाने का सबसे बड़ा आन्तरिक स्त्रोत है यहां मार्च से मई माह के मध्य नमक बनाने का कार्य किया जाता है। 
यहां पर नमक रेस्ता, क्यार दो विधियों से तैयार होता है। 
:-)यहां नमक केन्द्र सरकार के उपक्रम "हिन्दुस्तान साॅल्ट लिमिटेड" की सहायक कम्पनी 'सांभर साल्ट लिमिटेड' द्वारा तैयार किया जाता है।

:-)भारत के कुल नमक उत्पादन का 8.7 प्रतिशत यहां से उत्पादित होता है।

:-)यहां पर स्पाईरूलीना नामक शैवाल पाया जाता है जिसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है।

:-)यहां पर साल्ट म्यूजियम(रामसर साईट पर्यटन स्थल) बनाया गया है।

:-)दादू दयाल(राजस्थान का कबीर) ने प्रथम उपदेश सांभर झील के किनारे दिये।

:-)इसी झील के किनारे शाकम्भरी माता का मंदिर बना हुआ है। जिसे तीर्थो कि नानी और देवयानी माता भी कह जाता है।

:-)अकबर और जोधा का विवाह भी यहाँ भी हुआ कुरजां और राजहंस पक्षी आते है।

2.पंचभद्रा (बाड़मेर)🌐🌐🌐🌐🌐🌐
🔶राजस्थान के बाड़मेर जिले के बालोत्तरा के पास स्थित है। 🔶इस झील का निर्माण पंचा भील के द्वारा कराया गया अतः इसे पंचभद्रा कहते है। 🔶इस झील का नमक समुद्री झील क नमक से मिलता जुलता है।🔶 इस झील से प्राप्त नमक में 98 प्रतिषत मात्रा सोडियम क्लोराइड है। अतः यहां से प्राप्त नमक उच्च कोटी है। 🔶इस झील से प्राचीन समय से ही खारवाल जाति के 400 परिवार मोरली वृक्ष की टहनियों(वायु रेस्ता विधि) से नमक के (क्रीस्टल) स्फटिक तैयार करते है।

3.डीडवाना झील (नागौर)🌕🌕🌕🌕🌕
🔷राजस्थान के नागौर जिले में लगभग 4 वर्ग कि.मी. क्षेत्र में फैली इस झील में सोडियम क्लोराइड की बजाय सोडियम स्लफेट प्राप्त होता है। अतः यहां से प्राप्त नमक खाने योग्य नहीं है। 🔷इसलिए यहां का नमक विभिन्न रासायनिक क्रियाओं में प्रयुक्त होता है।🔷 कुओ द्वारा नमक का उत्पादन कोसिया पद्धति द्वारा डीडवाना झील नागौर इसक दूसरा नाम खल्दा झील भी है। 🔷सरकी माता या पाढा माता का मंदिर है।

🔷इस झील के समीप ही राज्य सरकार द्वारा "राजस्थान स्टेट केमिकलवक्र्स" के नाम से दो इकाईयां लगाई है जो सोडियम सल्फेट व सोडियम सल्फाइट का निर्माण करते है। थोड़ी बहुत मात्रा में यहां पर नमक बनाने का कार्य निजी इकाइयों द्वारा भी किया जाता है जिन्हें 'देवल' कहते हैं। 🔷इनमें नमक पुराने तरीके से बनाया जाता है।

4.लूणकरणसर (बीकानेर)⛔⛔⛔⛔⛔
🔺राजस्थान के बीकानेर जिले में स्थित यह झील अत्यन्त छोटी है। परिणामस्वरूप यहां से थोडी बहुत मात्रा में नमक स्थानीय लोगो की ही आपूर्ति कर पाता है। 🔺उत्तरी राजस्थान की एकमात्र खारे पानी की झील है।

🔺लूणकरणसर मूंगफली के लिए प्रसिद्ध होने के राजस्थान का राजकोट कहलाता है।

5.नावां झील(नागौर)🔴🔴🔴🔴🔴🔴
🔻यह झील नागौर जिले में स्थित है 
🔻आदर्श लवण पार्क की स्थापना की गई है।

6.तालछापर झील 🔵🔵🔵🔵🔵🔵🔵
यह झील चुरू में स्थित खारे पानी की झील है

7. कावोद झील 🔲🔲🔲🔲🔲🔲🔲🔲
यह झील जैसलमेर में स्थित खारे पानी की झील है
8. डेगाना झील 🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯
यह झील नागौर जिले में स्थित खारे पानी की झील है 🔚🔚🔚🔚🔚



Thanks for learning 🌈🌕🌈🌕

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