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विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव - Magnetic Field, Electric Generator & Motor

विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव - विद्युत मोटर, जनरेटर तथा फ्लेमिंग के नियम चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field):- चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field) किसी चुम्बक या धारावाही चालक के चारों ओर वह क्षेत्र, जिसमें उसके चुम्बकीय प्रभाव (आकर्षण/प्रतिकर्षण बल) का अनुभव किया जा सके, चुम्बकीय क्षेत्र कहलाता है। इसे B से दर्शाते है तथा इसका मात्रक टेस्ला (T) होता है। चुम्बकीय क्षेत्र एक सदिश राशि (vector quantity) है। On this Page: चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ (Magnetic Field Lines):- चुम्बक के चारों ओर वे काल्पनिक रेखाएँ जो चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा दर्शाती है, चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ कहलाती है। इनके गुण - 1. चुम्बक के बाहर ये उत्तरी ध्रुव (N) से दक्षिणी ध्रुव (S) की ओर तथा चुम्बक के अंदर दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर चलती है, अर्थात् ये सदैव बंद वक्र (closed curves) होती है। 2. दो चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ कभी एक-दूसरे को नहीं काटती। 3. जहाँ रेखाएँ पास-पास होती है, वहाँ चुम्बकीय क्षेत्र प्रबल (strong) होता है तथा जहाँ दूर-दूर होती है, वहाँ क्षेत्र दुर्बल (weak) होता है। धारावाही ...

differences between renewable and non-renewable energy resources - science 2026

ऊर्जा के स्रोत - नवीकरणीय व अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत ऊर्जा के स्रोत (Sources of Energy):- ऊर्जा के स्रोत - नवीकरणीय व अनवीकरणीय वह साधन जिससे हमें कार्य करने योग्य ऊर्जा प्राप्त होती है, ऊर्जा का स्रोत कहलाता है। एक अच्छे ऊर्जा स्रोत में निम्न गुण होने चाहिए - (1) प्रति एकांक आयतन/द्रव्यमान अधिक कार्य करने की क्षमता (2) आसानी से सुलभ (3) भण्डारण व परिवहन में आसान (4) सस्ता। On this Page: ऊर्जा के स्रोतों को मुख्यतः दो भागों में बाँटा जाता है - 1. नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत (Renewable Sources) 2. अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत (Non-Renewable Sources) 1. नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत (Renewable Sources):- वे ऊर्जा स्रोत जो प्रकृति में निरंतर व असीमित मात्रा में उपलब्ध रहते है तथा उपयोग करने पर समाप्त नहीं होते (पुनः प्राप्त हो जाते है), नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत कहलाते है। उदाहरण - सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल ऊर्जा, बायोमास, भूतापीय ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा। 2. अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत (Non-Renewable Sources):- वे ऊर्जा स्रोत जो प्रकृति में सीमित मात्रा में उपलब्ध है तथा एक बार उपयोग करने के बाद पुनः प्राप्...

विद्युत धारा एवं ओम का नियम - Resistance, Resistors in Parallel & Series

विद्युत धारा एवं ओम का नियम - प्रतिरोध, श्रेणीक्रम व पार्श्वक्रम संयोजन विद्युत धारा (Electric Current):- विद्युत धारा (Electric Current) किसी चालक में आवेश (charge) के प्रवाहित होने की दर को विद्युत धारा कहते है। इसे I से दर्शाते है तथा इसका मात्रक एम्पियर (A) होता है। On this Page:   विद्युत धारा (I) = आवेश (Q) / समय (t) ; मात्रक - एम्पियर (A) 1 एम्पियर धारा तब कहलाती है जब किसी चालक से 1 सेकंड में 1 कूलॉम आवेश प्रवाहित हो। परिपाटी (convention) अनुसार विद्युत धारा की दिशा धनावेश के प्रवाह की दिशा में मानी जाती है, जो इलेक्ट्रॉन प्रवाह (ऋणावेश) की दिशा के ठीक विपरीत होती है। विभवांतर (Potential Difference):- किसी चालक के दो बिन्दुओं के बीच 1 कूलॉम आवेश को एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक ले जाने में किए गए कार्य को विभवांतर कहते है। इसे V से दर्शाते है तथा इसका मात्रक वोल्ट (V) होता है। विभवांतर को वोल्टमीटर से मापा जाता है तथा इसे परिपथ में सदैव समान्तर क्रम (parallel) में जोड़ा जाता है। विद्युत धारा को अमीटर से मापा जाता है तथा इसे परिपथ में सदैव श्रेणीक्र...

तल्लीनाथ जी - राजस्थान के प्रकृति प्रेमी लोक देवता ( Tallinath ji )

तल्लीनाथ जी - राजस्थान के प्रकृति प्रेमी लोक देवता राजस्थान की धरती लोक देवताओं की भूमि कही जाती है, जहाँ हर देवता किसी न किसी विशेष गुण या कार्य के लिए पूजनीय हैं। इसी कड़ी में  तल्लीनाथ जी  का नाम बड़े श्रद्धा से लिया जाता है। ये एकमात्र ऐसे लोक देवता हैं जिन्होंने पेड़ों की रक्षा और प्रकृति संरक्षण को अपने जीवन का उद्देश्य बनाया, इसीलिए इन्हें  "ओरण के देवता"  और  "प्रकृति प्रेमी लोक देवता"  भी कहा जाता है। परिचय विवरण जानकारी वास्तविक नाम गांगदेव राठौड़ जन्म स्थान शेरगढ़, जोधपुर पिता वीरमदेव भाई राव चूड़ा गुरु जालंधर नाथ अन्य नाम ओरण के देवता, जालौर के प्रसिद्ध लोक देवता, प्रकृति प्रेमी लोक देवता प्रमुख पूजा स्थल पाँचोटा गाँव, जालौर जन्म और प्रारंभिक जीवन तल्लीनाथ जी का जन्म जोधपुर के शेरगढ़ क्षेत्र में हुआ था। इनका वास्तविक नाम  गांगदेव राठौड़  था और ये शेरगढ़ के सामंत (जागीरदार) परिवार से थे। इनके पिता वीरमदेव और भाई राव चूड़ा भी उस क्षेत्र के प्रतिष्ठित राठौड़ शासक थे। राजपरिवार में जन्म लेने के बावजूद...

प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण 2026 (Dispersion, Rainbow, Scattering)

प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण एवं वायुमंडलीय अपवर्तन - इंद्रधनुष, आकाश का नीला रंग प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण (Dispersion of Light):- प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण (Dispersion of Light) श्वेत प्रकाश (सूर्य के प्रकाश) के अपने घटक सात रंगों में विभाजित होने की घटना को वर्ण-विक्षेपण कहते है। सबसे पहले सर आइजक न्यूटन ने काँच के प्रिज्म की सहायता से यह सिद्ध किया कि श्वेत प्रकाश वास्तव में सात रंगों का मिश्रण है। On this Page:   सात रंगों का क्रम (VIBGYOR) - बैंगनी, जामुनी (नील), नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल वर्ण-विक्षेपण का कारण - श्वेत प्रकाश के विभिन्न रंगों (तरंगदैर्ध्य) की काँच में चाल भिन्न-भिन्न होती है, जिसके कारण उनके अपवर्तनांक भी भिन्न होते है। परिणामस्वरूप प्रत्येक रंग अलग-अलग कोण पर मुड़ता है। बैंगनी रंग सबसे अधिक विचलित (deviate) होता है, क्योंकि इसकी तरंगदैर्ध्य सबसे कम व अपवर्तनांक सबसे अधिक होता है। लाल रंग सबसे कम विचलित होता है, क्योंकि इसकी तरंगदैर्ध्य सबसे अधिक व अपवर्तनांक सबसे कम होता है। नोटः- प्रिज्म में अपवर्तन के कारण रंगों का विक्षेपण होता है, परन्त...

Human Eye 2026 - Defects of Vision (Myopia, Hypermetropia, Presbyopia)

मानव नेत्र (Human Eye) एवं उससे संबंधित दोष तथा निवारण मानव नेत्र (Human Eye):- मानव नेत्र (Human Eye) मानव नेत्र प्रकाशिक यंत्र की भांति कार्य करता है, जिसकी सहायता से हम अपने चारों ओर की वस्तुओं को देख पाते है। नेत्र में प्रकाश के अपवर्तन के कारण ही रेटिना पर वस्तु का प्रतिबिम्ब बनता है। मनुष्य की आँख गोलाकार होती है, जिसका व्यास लगभग 2.3 सेमी होता है। On this Page: आँख के प्रमुख भाग एवं उनके कार्य - क्र.स. भाग कार्य 1. कॉर्निया (Cornea) आँख का सबसे बाहरी पारदर्शी उभरा हुआ भाग, जहाँ से अधिकांश अपवर्तन होता है 2. आइरिस (Iris) आँख का रंगीन भाग, जो पुतली के आकार (size) को नियंत्रित करता है 3. पुतली (Pupil) आँख में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करती है 4. अभिनेत्र लेंस (Eye Lens) एक उत्तल लेंस, जो रेटिना पर वास्तविक व उल्टा प्रतिबिम्ब बनाता है 5. सिलियरी मांसपेशियां (Ciliary Muscles) अभिनेत्र लेंस की वक्रता (मोटाई) को बदलकर फोकस दूरी म...

Refraction of Light 2026 - Lens (Convex Lens,Concave Lens)

प्रकाश का अपवर्तन - उत्तल व अवतल लेंस तथा इसके उपयोग प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of Light)- प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of Light) जब प्रकाश की किरण एक पारदर्शी माध्यम (जैसे वायु) से दूसरे पारदर्शी माध्यम (जैसे काँच या जल) में जाती है, तो दोनों माध्यमों के घनत्व भिन्न होने के कारण प्रकाश की चाल बदल जाती है, जिससे प्रकाश की किरण अपने मूल पथ से मुड़ जाती है। इसी घटना को प्रकाश का अपवर्तन कहते है। On this Page: अपवर्तन के नियम- (1) आपतित किरण, अभिलम्ब तथा अपवर्तित किरण तीनों एक ही तल में होती है। (2) दो माध्यमों के लिए आपतन कोण की ज्या (sine) तथा अपवर्तन कोण की ज्या (sine) का अनुपात सदैव नियत रहता है, जिसे उस माध्यम का अपवर्तनांक कहते है। इसे स्नैल का नियम (Snell's Law) भी कहते है।   अपवर्तनांक (n) = sin i / sin r (i = आपतन कोण, r = अपवर्तन कोण) नोटः- जब प्रकाश सघन माध्यम (जैसे जल/काँच) से विरल माध्यम (जैसे वायु) में जाता है तो अभिलम्ब से दूर हट जाता है, तथा विरल से सघन माध्यम में जाने पर अभिलम्ब की ओर मुड़ जाता है। तालाब का पानी वास्तविक गहराई से कम गहरा दि...